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世界水周:盘点中国资源现状

世界水周 近日在斯德哥尔 摩拉开帷幕。今年的与会者关注的主题是节水和再利用。设定这一主题的理由很充分:全球缺水问题正在加剧。 淡水是一种珍稀资源,仅占到地表水的2.5%,其中 70%封存在冰 川之中。但人类可获取的那一小部分淡水对地球的健康至关重要。每平方千米淡水生态系统的生物多样性 几乎高于其他 任何生态系统。目前,热带雨林是全球生物多样性最丰富的生态系统,所占面积虽不到地表的2%, 但生活着全球约50% 的物种。相比之下,淡水生态系统仅覆盖0.1%的地表,却生活着超过10万种已知物种。地球上大部分水生生物需要生活在有淡水流动的栖息地,而这些栖息地就位于罕见的淡水生态 系统之中。相关渔业是 千百万人获取食物和生计的重要来源。 全球河流正面临威胁,这一问题并非中国独有。过度开发河流需要付出很大代价。2015年,世界经济论坛将全球水危机列为“未来10年这个星 球面临的最大威胁”。 河流的水资源开采威胁着数百万人的生计,污染因此加重,国家之间的关系愈发紧张。 中国的淡水危机 河流养育了一代又一代中国人,是民族身份和传承 的重要组成部分。 亚洲一些最具代表性的河流都发源于中国。流经6个国家的澜沧江(湄公河)发源于中国青藏高原,澜沧-湄公河是东南亚大 陆的灵魂和心脏,培养 了全球最活跃的渔业之一,养活了至少6000万人口,为他们提供 食物、用水和交通所需。 但随着河流开发热潮的掀起, 中国常常牺牲河流以 换取经济发展。时至今日,中国大多数河流都面临污染、筑坝、改道、以及被工农业过度使用等问题。 更令人震惊的是,很多河流就这么消 失了。中国统计局 数据显示,二十世纪80年代中国有5万条河流,而目前仅剩2.3万条。 过度使用已经给水资源带来日益沉重的负担。中国拥有全球 20%的人口,但淡水资源仅 占全球总量的7%。 更重要的是,中国淡水 资源的分布并不均衡,约70%位于南部省份,但事实上较为干旱的北部省份才是中国农产品、制造业以及水资源密集型能源的主要产地。 结果是缺水问题不断加剧。中国11个省份,总计5.1亿人口的年人均水资 源量 不足1000立方 米。这一水平已经被联合国和世界银行定义为水贫困,严重限制了粮食生产、经济发展以及自然系统的保护。 保持乐观的理由 好消息是,近年 来中国政府已经有意 重申保护淡水资源的决心。国家主席、总书...

जानते हैं टीवी रिमोट का कैसे हुआ था आविष्कार?

आज अगर आप टीवी पर कोई चैनल देखते हुए उकता जाते हैं तो फ़ौरन रिमोट से चैनल बदल देते हैं. टीवी पर विज्ञापनों के आते ही आवाज़ को म्यूट कर देते हैं. टीवी पर जो भी दिख रहा है, उसे देखें न देखें, सुनें न सुनें, इसका फ़ैसला दर्शकों के हाथ में होता है. अपनी पसंद-नापसंद वो रिमोट के ज़रिए आसानी से ज़ाहिर करते हैं. लेकिन, टीवी के दर्शक के हाथ में ये ताक़त यानी रिमोट किसने दी? क्या आप को पता है कि टीवी के रिमोट का आविष्कार कैसे हुआ ? इसकी शुरुआत एक चैलेंज के तौर पर हुई थी.  के दशक में अमरीकी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ज़ेनिथ के प्रमुख यूजीन एफ़ मैक्डॉनल्ड ने कंपनी के इंजीनियरों को एक चुनौती दी. असल में यूजीन को उस वक़्त बहुत कोफ़्त होती थी जब टीवी चैनलों पर विज्ञापन आने लगते थे. विज्ञापन के दौरान अगर चैनल बदलना हो तो हर बार उठकर टीवी के पास जाना होता था. उसके 'का न उमेठने' पड़ते थे. यूजीन को पूरी कवायद से परेशानी होती थी. तो, यूजीन ने अपनी कंपनी के इंजीनियरों से कहा कि वो ऐसा यंत्र बनाएं, जिससे वो दूर से बैठे-बैठे ही टीवी के चैनल बदल सकें या विज्ञापन आते वक़्त टीवी की यूजीन की...

ये पांच इतना क्यों याद आ रहे हैं आज?

विराट कोहली की बल्लेबाज़ी और हार्दि क-बुमराह की गेंदबाज़ी से अलग इस मैच में भारतीय टीम की फ़ील्डिंग, ख़ास तौर पर विकेट के पीछे कैचिंग ने काफ़ी निगाहें खींचीं. अक्सर ऐसा होता है कि गेंदबाज़ अच्छी गेंद डाले, बल्ले का किनारा भी लगे, लेकिन कैच टपका दी जाएं. इससे ना केवल बॉलर बल्कि पूरी टीम का हौसला जाता रहता है. लेकिन टीम इंडिया ने नॉटिंघम टेस्ट में इस मामले में कोई चूक नहीं की. बल्ले का किनारा लेकर पीछे जाने वाली गेंदों को विकेटकीपर और फ़ील्डरों ने लपकने में ज़रा ग़लती नहीं की. यूं तो पूरे मैच में कुछ मौकों को छोड़ दिया जाए तो पूरी भारतीय टीम की फ़ील्डिंग अच्छी रही, लेकिन ख़ास तौर से विकेटकीपर ऋषभ पंत और स्लिप में खड़े के एल राहुल की तारीफ़ करनी होगी. पंत ने पहली पारी में पांच कैच लपके जिनमें से कुछ वाक़ई मुश्किल थे. इसके अलावा राहुल ने दोनों पारियों में मिलाकर छह कैच पकड़े. भारत की राही सरनोबत ने शूटिंग में भारत के लिए दूसरा स्वर्ण पदक जीत लिया है. एशियाई खेलों में शूटिंग में गोल्ड जीतने वाली वो पहली महिला खिलाड़ी हैं. जकार्ता में चल रहे एशियाई खेलों में राही ने 25 मीटर...

《八百万》系列播客:第五集 垃圾焚烧——中国解决塑料问题的“快招”

国正着力解决其严重的垃圾危机。据世界银行报道,中国目前每年需处理2亿吨的垃圾。垃圾填埋场堆积如山,给周围社区造成了 负担。为解 决该问题,中国正建造垃圾焚烧发电厂,其数量比全世界其他地区加起来都多。但是垃圾焚烧真的是解决问题的正确方式吗?欢迎收听《八百万》系列播客节目。每年流入海洋环境的塑料垃圾有800万吨,在应对这一全球挑战的过程中,中国又发挥着怎样的作用呢?本节目将围绕这个问题展开讨论。《八百万》博客由可持续发展亚洲组织,及其合作伙伴中外对话和艾雅录音室共同出品。网购和外卖等新消费模式使得我们对塑料的需求逐渐增加。 毛达: 是遭遇了空前的危机… 旁白 :当下我们正面临空前的危机。 【音乐】 龙美诗 :中国正着力解决其严重的垃 圾危机。根据世界 银行的数据,中国目前每年要处理2亿吨的垃圾。 詹妮弗: 你可能对这些数据没有什么感觉[…]为了让您有一个直观的感受,2亿吨垃圾可以填满吉萨25个金字塔。 龙美诗 :您刚才听到的这位是詹妮弗·特纳,伍德罗·威尔逊中心中国环境论坛主任。 詹妮弗: 未来五年这一数字将达到5亿吨。每年5亿吨。这能填满多少个吉萨金字塔。所以对于城市来说,垃圾填埋场堆积如山,他们 需要找到解决 办法。让我很感兴趣的是,中国采取了垃圾焚烧的解决方案,不过这并不让我感到吃惊。 【音乐】 龙美诗 :我们在上一集中讨论了垃圾回收中存在的问题。中国的垃圾进口禁令已经让世界垃圾产业陷入危机。就像香港环保企业家道格·伍德林告诉我的那样…… 道格 :如果我们真的想解决海洋垃圾问题。 龙美诗: 我们需要研究垃圾焚烧发电的问题。 道格 :即使您在每个产品的底部都能看到一个三角形的回收标志,但事实上,世界90%的塑料未被回收利用。这意味着这些塑料本可以回收利用但却没有。世界上大多数国家都没有回收基础设施。 龙美诗: 那些没有被回收的垃圾会去哪里呢?据埃伦麦克阿瑟基金会估计,有40%被填埋了,还有三分之一最终会流入自然界 。对此,我们还有什 么其他解决办法吗?我问了尼古拉斯·塞梅利斯这个问题,他是全球废弃物发电技术方面的专家。他在哥伦比亚大学教书,家就住在学校附近。我拨通了他家的电话。首先,什么是垃圾焚烧发电? 塞梅利斯 :城市固体废弃物在经过所有可能的回收和堆肥处理之后,最终会剩下回收后的废弃物。这些废弃物至少占城市...

समुद्री जीव प्लास्टिक क्यों खाते है?

ब्लू प्लैनेट II के बारे में हाल ही के एक इंटरव्यू में, डेविड एटेनबोरो ने एक दृश्य का वर्णन किया जिसमें एक एल्बेट्रोस अपने बच्चों को खाना खिलाने के लि ए घोंसले में आती है. उन्होंने कहा, "जानते हैं उसके मुंह से बाहर क्या आया? ना मछली, और ना स्क्विड- जो वो ज़्यादातर खाते हैं. बल्कि उसके मुंह से बाहर निकला प्लास्टिक." एटेनबोरो कहते हैं कि ये दिल को काफ़ी चोट पहुंचाने वाला और साथ ही बेहद अजीब था. एल्बेट्रोस अपने पसंदीदा शिकार के लिए कई हज़ार किलोमीटर लंबा सफ़र करती है. वह पानी से अपना शिकार बड़ी आसानी से पकड़ लेती है. ऐसे में इतने समझदार पक्षी का इतनी आसानी से मूर्ख बन जाना और शिकार के लिए इतना लंबा सफर तय करने के बाद मुंह में प्लास्टिक भर कर लाना समझ नहीं आता. तसल्ली की बात ये है कि ऐसा करने वालों में एल्बेट्रोस अके ली नहीं है. छोटे -छोटे जीवों से लेकर बड़ी व्हेल मछली तक समुद्री जीवों की लगभग 180 प्रजातियां प्लास्टिक खा रही हैंयहां तक की प्लास्टिक उन मछलियों के अंदर भी पाया गया है जिन्हें हम रोज खाते हैं. यही नहीं, हमारे पसंदीदा लॉबस्टर्स और मुसेल्स के अंदर भी ...

आरक्षित पदों पर भर्ती का पेंच क्या? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

विश्वविद्यालयों में आरक्षित पदों पर शिक्षकों की भर्ती का तरी क़ा क्या हो, इस पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. पिछले महीने ही यूजीसी ने विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती रोक देने का आदेश दिया था. दरअसल, केंद्र ने ही सुप्रीम कोर्ट में भर्ती के तरीक़े को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फ़ैसले को चुनौती दी है. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विवेकानंद तिवारी ने इलाहाबाद कोर्ट में याचिका डाली कि विश्वविद्यालय को नहीं बल्कि इसके विभागों को इकाई मानकर आरक्षण दिया जाए. हाई कोर्ट ने 7 अप्रैल 2017 को इस याचिका के पक्ष में फैस ला दिया. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट गया, पर राहत नहीं मिली. यूजीसी ने 5 मार्च को इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फ़ैसले को लागू कर दिया और इसके बाद केंद्रीय और राज्यों के विश्वविद्यालयों में भर्ती शुरू भी हो गई. भर्तियों के बाद सामने आया कि इस नए नियम की वजह से दो-तिहाई पद अनारक्षित वर्ग को चले गए. ये मामला संसद में भी उठा और सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने तक सरकार ने यूजीसी को भर्तियां रोक देने का आदेश दिया. इलाह...

धारा-377 पर सुप्रीम कोर्ट में अब तक क्या हुआ है?

देश की सर्वोच्च अदालत ने दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बनाए गए यौन संबंध को आपराधिक कृत्य बताने वाली आईपीसी की धारा-377 की क़ानूनी वैधता जाँचने का ज़िम्मा उठाया है.आईपीसी की धारा-377 के मुताबिक़, अगर को ई व्यक्ति अ प्राकृतिक रूप से यौन संबंध बनाता है तो उसे उम्रक़ैद या जुर्माने के साथ दस साल तक की क़ैद हो सकती है. आईपीसी की ये धारा लगभग 150 साल पुरानी है और महारानी विक्टोरिया के दौर की नैतिकता का अवशेष मात्र है. सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला जल्द] समलैंगिकों को मूलत: एलजीबी टीक्यू (लेस्बियन, गे, बाय- सेक्शुअल्स, ट्रांसजेंडर्स और क्वीर) कहा जाता है. अक्तूबर, 2017 तक दुनिया के 25 देशों में समलैंगिकों के बीच यौन संबंध को क़ानूनी मान्यता मिल चुकी है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंगटन नरीमन, जस्टिस एएम कनविल कर, जस्टिस डीवाय चंद्रचू ड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ कर रही है. इससे पहले 9 जज़ों की बैंच निज ता के अधिकार को मूल अधि कार करार दे चुकी है और अब इन पाँच जजों की ये बेंच ये देखेगी कि क्या मौलिक अधिकार और जीवन जीने ...